तुम आए हो मेरे सामने इक प्रीत की तरह
आओ गुनगुना लूं तुम्हें इक गीत की तरह
छा रही है सब तरफ आलम-ए-मदहोशी
कूचा-2 महकने लगा है पत्तों में हो रही सरगोशी
तुम आए हो मेरे सामने इक पैगाम की तरह
आओ पी लूं तुम्हें इक जाम की तरह
फिज़ाओं में लरजने लगा है इक तराना
गाने लगे हैं भंवरे कलियों ने सीखा है इतराना
तुम आए हो मेरे सामने जुस्तजू की तरह
आओ बिखेर दूं तुम्हें इक खुशबू की तरह
छा गये हो इन पर्वतों पे तुम यूं घनेरे
दरिया तूफानी कह रहा तुम हो मीत मेरे
तुम आए हो मेरे सामने इकरार की तरह
आओ अपना लूं तुम्हें इक प्यार की तरह
आओ अपना लूं तुम्हें....................... .!!
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11 टिप्पणियॉं:
क्या कहने,
बहुत सुंदर
kya bat hai bahut sundar , badhai
बहुत सुन्दर...
सुदर एवं बढ़िया प्रस्तुति....
समय मिले तो कभी आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है
http://mhare-anubhav.blogspot.com/
खूबसूरत जज्बात
तुमने लिखा , हम गुनगुनाते रहे , गीत की तरह ,
कभी ब्लॉग पे ,कभी फ़ेसबुक ,वो मिले मीत की तरह
शुभकामनाएं सुमन जी । लिखती रहें
छा गये हो इन पर्वतों पे तुम यूं घनेरे
दरिया तूफानी कह रहा तुम हो मीत मेरे
तुम आए हो मेरे सामने इकरार की तरह
आओ अपना लूं तुम्हें इक प्यार की तरह
आओ अपना लूं तुम्हें........................!बहुत ही सुन्दर रचना....
सुन्दर रचना...
सादर...
आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
चर्चा मंच 659,चर्चाकार-दिलबाग विर्क
shukriya rajnish ji meri rachna ko sthan dene ke liye.....
sabhi doston ka tahe dil se shukriya pasand karne ke liye
ajay jha ji..bahut bahut shukriya... ham sab ek dusare le meet hi to hain is shabd path par...
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