रमधनिया की पौ-बारह है आया ट्विस्‍ट कहानी में।



-शैलेन्‍द्र शर्मा
 
रम‍धनिया की जोरू धनिया जीत गई परधानी में।
रमधनिया की पौ-बारह है आया ट्विस्‍ट कहानी में।

पलक झपकते कहलाया वो रमधनिया से राम धनी
घूरे के भी दिन फिरते हैं सच्‍ची हो गई बात सुनी
लम्‍बरदार चौधरी रहते अब उसकी अगवानी में।

जो बेगार लिया करते थे आदर से बैठाते हैं
उसकी बाँछें खिली देखकर अंदर से जल जाते हैं
तिरस्‍कार की जगह शहद अब उनकी बोली-बानी में।

एक साल के भीतर-भीतर झुग्‍गी से बन गया महल
उसकी ओर न रूख करते थे वे करते हैं आज टहल
अब वो मौ‍ज लिया करता है उनकी गलत-बयानी में।

पहले जो डपटा करते थे उसे देख मुस्‍काते हैं
वही दरोगा, वही बीडीओ आकर हाथ मिलाते हैं
आने लगा मजा अब उसको ऐयारी-दीवानी में।
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7 टिप्‍पणियॉं:

Sameer.Shrivastava ने कहा…

sharma jee ka navgeet badhiya hai, badhai.

mridula pradhan ने कहा…

रम‍धनिया की जोरू धनिया जीत गई परधानी में।
रमधनिया की पौ-बारह है आया ट्विस्‍ट कहानी में।
bahut sunder......

अजय कुमार झा ने कहा…

इत्ता मजा पा गए इस कहानी में ,
रुक रुक के तो क्या पढते , पढ गए एक रवानी में

अजय कुमार झा ने कहा…

इत्ता मजा पा गए इस कहानी में ,
रुक रुक के तो क्या पढते , पढ गए एक रवानी में

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

आनंद आ गया.... पढ़कर...
सादर...

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

राजू राजाराम बन गया ।

mahendra srivastava ने कहा…

क्या कहने, बहुत सुंदर