मूस जी मुसटन्डा...
-
मूस जी मुसटन्डा-कृष्णेश्वर डींगर
मूस ही मुस्टंडा,लिये हाथ में डंडा।
बिल्ली बोली म्याऊँ,किस चूहे को खाऊँ।
मूस ही मुस्टंडा,गिरा हाथ से डंडा।
बिल्ली जी ...
आस-पास नज़र रखो
लोगों की खबर रखो
कौन अजनबी कहां घात है लगा रहा.
सावधान, वक्त आज तुमको जगा रहा.
छोड़कर निशानियां
फूट की. जो आए दिन,
गढ़ रहे कहानियां
झूठ की जो आए दिन,
उनका चिटठा खोलो,
क्या है सच्चा, बोलो,
खींच लो जुबान उसकी जो है बरगला रहा.
सावधान. वक्त आज तुमको जगा रहा.
पथ है अनजाना तो
कुछ डर भी होंगे ही,
हर सवाल के लेकिन
उत्तर भी होंगे ही,
जिन्हें तुम्हे पाना है,
हौसला बनाना है,
कन्धों पर भार तुम्हारे है अब आ रहा.
सावधान, वक्त आज तुमको जगा रहा!
आस-पास नज़र रखो लोगों की खबर रखो कौन अजनबी कहां घात है लगा रहा. सावधान, वक्त आज तुमको जगा रहा.
छोड़कर निशानियां फूट की. जो आए दिन, गढ़ रहे कहानियां झूठ की जो आए दिन, उनका चिटठा खोलो, क्या है सच्चा, बोलो, खींच लो जुबान उसकी जो है बरगला रहा. सावधान. वक्त आज तुमको जगा रहा.
पथ है अनजाना तो कुछ डर भी होंगे ही, हर सवाल के लेकिन उत्तर भी होंगे ही,
जिन्हें तुम्हे पाना है, हौसला बनाना है, कन्धों पर भार तुम्हारे है अब आ रहा. सावधान, वक्त आज तुमको जगा रहा! बच्चों को चेताती वीर -भाव और सजगता पैदा करती रचना .आभार .
मूस जी मुसटन्डा...
-
मूस जी मुसटन्डा-कृष्णेश्वर डींगर
मूस ही मुस्टंडा,लिये हाथ में डंडा।
बिल्ली बोली म्याऊँ,किस चूहे को खाऊँ।
मूस ही मुस्टंडा,गिरा हाथ से डंडा।
बिल्ली जी ...
आ रहा है नया सर्च इंजन "वोलुनिया" !
-
पिक्चर 1 पिक्चर 2 पिक्चर 3 गूगल इन्टरनेट के क्षेत्र में एक जाना माना सर्च
इंजन है जिसको हर कोई यूज करता है , अगर हम इन्टरनेट पर किसी भी जानकारी को
ढूढना ...
कभी देखा है ऐसा साँप?
-
बलरामपुर, उत्तर प्रदेश में मिला ग्रीन कीलबैक साँप
बलरामपुर, उत्तर प्रदेश के पूर्वी सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग के जरवा क्षेत्र में एक दुर्लभ प्रजाति का साँप ...
ब्लाग के लिये रचनाकारों से मौलिक एवं स्वरचित रचनायें आमंत्रित हैं। हमारा पता है- ज़ाकिर अली ‘रजनीश’, 7ए/55, वृन्दावन योजना, रायबरेली रोड, लखनऊ-226025. मोबाइल:-099359-23334 ईमेल:-zakirlko@gmail.com
10 टिप्पणियॉं:
सुबह सुबह अच्छी रचना पढ़वाने के लिए आभार
क्या कहने, बहुत सुंदर
तैलंग जी की अच्छी रचना हम तक पहुंचाने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया।
बच्चों के लिए ऐसी कविताएं कम ही पढ़ी हैं। अक्सर तो प्रार्थना में भी उन्हें अपराधी होने का अहसास कराया जाता है।
आस-पास नज़र रखो
लोगों की खबर रखो
कौन अजनबी कहां घात है लगा रहा.
सावधान, वक्त आज तुमको जगा रहा.
छोड़कर निशानियां
फूट की. जो आए दिन,
गढ़ रहे कहानियां
झूठ की जो आए दिन,
उनका चिटठा खोलो,
क्या है सच्चा, बोलो,
खींच लो जुबान उसकी जो है बरगला रहा.
सावधान. वक्त आज तुमको जगा रहा.
पथ है अनजाना तो
कुछ डर भी होंगे ही,
हर सवाल के लेकिन
उत्तर भी होंगे ही,
जिन्हें तुम्हे पाना है,
हौसला बनाना है,
कन्धों पर भार तुम्हारे है अब आ रहा.
सावधान, वक्त आज तुमको जगा रहा!
बच्चों को चेताती वीर -भाव और सजगता पैदा करती रचना .आभार .
सुंदर रचना पढ़वाने के लिए आभार!
बहुत सुंदर कविता जो जगाने का कार्य करती है.
रमेश तैलंग जी की सुन्दर वैचारिक रचना पढ़वाने के लिए आभार...
वाह ....बहुत खूब ...ब्लोगिंग शुरू करते ही ...बहुत अच्छी रचना पढने को मिली ...आभार आपका
bahut sundar
सभी सुविग्य जनों के प्रति मेरा दृदय से आभार. आप सब का स्नेह/प्रोत्साहन मुझे रचनात्मक बल देता है. -रमेश तैलंग
एक टिप्पणी भेजें