पटवारी, दरोगा सभी को इसकी फिकर है, सबके चढ़ी कपार में जोखू की बहन है।


-पुष्‍पा सुमन

किस्‍मत की सख्‍त मार में जोखू की बहन है।
जीवन की बीच धार में जोखू की बहन है।

खेती तो सिर्फ ब्‍याज को भरने में बिक गयी,
बाकी अभी उधार में जोखू की बहन है।

पटवारी, दरोगा सभी को इसकी फिकर है,
सबके चढ़ी कपार में जोखू की बहन है।

इठला रही है देख बुढ़ापे की हसरतें,
गोया चढ़ी बहार में जोखू की बहन है।

बचपन नहीं देखा है, जवानी नहीं जानी,
इस दौर में उतार में जोखू की बहन है।

बोतल में दिख रही थी, कभी थी गिलास में,
मुखिया के अब खुमार में जोखू की बहन है।

कल रात था साहब के यहाँ कोई जनम दिन,
तबसे पड़ी बुखार में जोखू की बहन है।

जबसे लगी है गाँव में चीनी की फैक्‍ट्री,
तबसे किसी की कार में जोखू की बहन है।

हर आँख लगाती है सुमन कीमतें यहाँ,
जैसे खड़ी बजार में जोखू की बहन है।
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9 टिप्‍पणियॉं:

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत सुन्दर भावाभिब्यक्ति | धन्यवाद|

प्रज्ञा पांडेय ने कहा…

aaj ke sach ko kahati hui kavita , bahut achchi lagee . badhayi

सुधाकर अदीब ने कहा…

अत्यंत मार्मिक ग़ज़ल । मननीय । उल्लेखनीय ।
खेती तो सिर्फ ब्‍याज को भरने में बिक गयी,
बाकी अभी उधार में जोखू की बहन है।

वन्दना ने कहा…

गज़ब्…………अत्यंत मार्मिक चित्रण्।

सुमन'मीत' ने कहा…

achchhi rachna...

दिगम्बर नासवा ने कहा…

मार्मिक ... छुपा आक्रोश निकल कर आ रहा है इस गज़ल में ... बेहद प्रभावी हैं सब शेर ...

प्रेम सरोवर ने कहा…

बचपन नहीं देखा है, जवानी नहीं जानी,
इस दौर में उतार में जोखू की बहन है।
आपकी अभिव्यक्ति अच्छी लगी । धन्यवाद । मेरे पोस्ट पर आपका आमंत्रण है ।

veerubhai ने कहा…

पटवारी, दरोगा सभी को इसकी फिकर है, सबके चढ़ी कपार में जोखू की बहन है।

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बोतल में दिख रही थी, कभी थी गिलास में,
मुखिया के अब खुमार में जोखू की बहन है।अपने समय से संवाद करती सवाल पूछती ग़ज़ल एक एक अलफ़ाज़ चाक़ू की धार सा .
शनिवार, १० सितम्बर २०११
अब वो अन्ना से तो पल्ल्ला छुडा रहें हैं .

Ajit Singh Taimur ने कहा…

jokhu ki bahan .....behtareen rachna ......waah ....saari rachnaayen bahut achhi hain