जिस्म क्या है रूह तक सब कुछ ख़ुलासा देखिये।
आप भी इस भीड़ में घुस कर तमाशा देखिये।
जो बदल सकती है इस पुलिया के मौसम का मिजाज़,
उस युवा पीढ़ी के चेहरे की हताशा देखिये ।
जल रहा है देश यह बहला रही है क़ौम को,
किस तरह अश्लील है कविता की भाषा देखिये।
मत्स्यगंधा फिर कोई होगी किसी ऋषि का शिकार,
दूर तक फैला हुआ गहरा कुहासा देखिये ।।
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13 टिप्पणियॉं:
bilkul sahi kahaa desh kyaa ab to har insaan jal raha hai.
जो बदल सकती है इस पुलिया के मौसम का मिजाज़,
उस युवा पीढ़ी के चेहरे की हताशा देखिये ।
बहुत ख़ूब!
वाक़ई ,,आज की युवा पीढ़ी अत्यधिक बुद्धिमान होते हुए भी सामाजिक कुव्यवस्थाओं के कारण हताशा की शिकार होती जा रही है
ज़ाकिर साहब अच्छी ग़ज़ले पढ़वाने के लिए शुक्रिया
अति सुन्दर।
bilkul sahi kahaa desh kyaa ab to har insaan jal raha hai.
ji haan aapki kosis mujhe bahut pasand aaye...baaki sabhi ki tarah...aasha hai aage bhi hame aapki kosiso ka fayeda hoga...isi ummeed me...
www.kavyalok.com
अच्छी प्रस्तुति।
मत्स्यगंधा फिर कोई होगी किसी ऋषि का शिकार,
दूर तक फैला हुआ गहरा कुहासा देखिये ।।
Wah ! Badhiya gazal .
such much gahare kuhase men hai desh.............
ना जाने पढ़ कर इसे शर्म सी क्यों आती है,
क्योकि उस युवा पीढ़ी के चेहरे की हताशा नज़र आती है !
देश को वास्तव में आज युवा सोच की ज़रूरत है युवा ताकत की ज़रूरत है !
वाह .. बहुत खूब !!
nice
जो बदल सकती है इस पुलिया के मौसम का मिजाज़,
उस युवा पीढ़ी के चेहरे की हताशा देखिये ।
जल रहा है देश यह बहला रही है क़ौम को,
किस तरह अश्लील है कविता की भाषा देखिये।
वाह लाजवाब। बधाई
जो बदल सकती है इस पुलिया के मौसम का मिजाज़,
उस युवा पीढ़ी के चेहरे की हताशा देखिये ।
जल रहा है देश यह बहला रही है क़ौम को,
किस तरह अश्लील है कविता की भाषा देखिये।
वाह लाजवाब। बधाई
adam is samay ke bade kavi-shayar hai.
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