-डा0 हरिराज सिंह ‘नूर’-
झरनों का संगीत, हवा का गीत, पलों का साज़ सुनो।
मेरी ग़ज़ल के पैराए में तुम रब की आवाज़ सुनो।।
हर लम्हा पैग़ामे-मुहब्बत दुनिया को देती आई,
सुनना है तो अपने दिल से शाइर की आवाज़ सुनो।
ख़ुशियों के रंगीन नज़ारे, दुनिया भर के लोगों को,
सुबह फ़लक से बोल रही है, उसके मुँह से राज़ सुनो।
ज़हरीला माहौल फ़ना हो धीरे - धीरे बस्ती से,
हम सबको मिलकर कुछ ऐसा करना है आगाज़ सुनो।
मैंने भी तब्दील किया है, अब जीने का ढ़ंग ज़रा,
मुझको देख के कुछ-कुछ बदला उसने भी अंदाज़ सुनो।
तुम चाहे जितने भी पहरे ‘नूर’ बिछा लो गुलशन में,
रोक नहीं पाओ हमको करने से परवाज़ सुनो।
..वयस्क श्रोताओं के बीच बाल कहानियों का पाठ।
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‘साझी दुनिया’ लखनऊ की एक चर्चित संस्था है, जो ‘झूठा सच’ जैसे युगान्तरकारी उपन्यास लिखने वाले रचनाकार यशपाल जी के महानगर स्थित मकान (बी-335) में स्थित है। ...
2 दिन पहले


4 टिप्पणियॉं:
ज़हरीला माहौल फ़ना हो धीरे - धीरे बस्ती से,
हम सबको मिलकर कुछ ऐसा करना है आगाज़ सुनो।
बहुत ही बेहतरीन रचना,
मैंने भी तब्दील किया है, अब जीने का ढ़ंग ज़रा,
मुझको देख के कुछ-कुछ बदला उसने भी अंदाज़ सुनो।
umda laine .
आभार इस बेहतरीन रचना को यहाँ लाने के लिए.
बहुत उम्दा रचना!!बधाई।
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