आज फिर शाम से उदासी है।
फिर कोई आरजू सी प्यासी है।
कैसे इज़हार हो मोहब्बत का,
बात कहने को ये ज़रा सी है।
मेरी आँखों को मिल गये आँसू,
रूह तो अब भी मेरी प्यासी है।
साकिया अब तो उठा दे ये नक़ाब,
मैक़दे में बहुत उदासी है।
सैकड़ों ग़म मेरी तलाश में हैं,
और ये जान इक ज़रा सी है।


4 टिप्पणियॉं:
सैकड़ों ग़म मेरी तलाश में हैं,
और ये जान इक ज़रा सी है।"
वाह ! मुग्ध हुआ ।
राजीव जी कुछ नये बिम्बों को लेकर गज़ल कहें तो मज़ा आये..
कैसे इज़हार हो मोहब्बत का,
बात कहने को ये ज़रा सी है।
सभी शेर पसंद आये
खूबसूरत गजल
वीनस केसरी
Aakhiri sher men sudhar ki zaroorat hai. kuchh yun hona chahiye:-
saekadon gam humen rahe ghere,
bat kahne ko ye zara - si hai.
Kunwar Kusumesh
4/738, Vikas Nagar,
Lucknow-226022
Mob:09415518546
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