सितारे कहानी सुनाने लगे हैं

सितारे कहानी सुनाने लगे हैं।
-मनीष-

नज़र की शमा को बुझाने लगे हैं।
उजाले अंधेरा बढ़ाने लगे हैं।

सफ़र ख़ाक1 में मिलने वाला है शायद,
मुसाफिर बग़ूले उड़ाने लगे हैं।

क़मर2 ने ख़ुदा जाने क्या कह दिया है,
समन्दर के लब3 थर-थराने लगे हैं।

मिरे रतजगों4 से परेशान होकर,
सितारे कहानी सुनाने लगे हैं।

ख्यालों की परवाज़5 बढ़ने लगी है,
ख़लाओं6 से पैग़ाम आने लगे हैं।

तिरा दर्द अब जाविदां7 हो चला है,
कि दिन रात हम मुस्कराने लगे हैं।

तमाशे की अब इन्तेहा हो रही है,
तमाशाई उठ-उठ के जाने लगे हैं।

1– धूल 2– चाँद 3– होंठ 4– रात्रि जागरण
5– उड़ान 6– अंतरिक्ष 7– अमर

3 टिप्‍पणियॉं:

Arvind Mishra ने कहा…

इक सुन्दर प्यारी सी गजल !

MANVINDER BHIMBER ने कहा…

ख्यालों की परवाज़5 बढ़ने लगी है,
ख़लाओं6 से पैग़ाम आने लगे हैं।

तिरा दर्द अब जाविदां7 हो चला है,
कि दिन रात हम मुस्कराने लगे हैं।

behad khoobsurat bhaw hai is gajal mia

दिगम्बर नासवा ने कहा…

ख्यालों की परवाज़5 बढ़ने लगी है,
ख़लाओं6 से पैग़ाम आने लगे हैं।

lajawaab..........gazal ka har sher khoobsoorat