सितारे कहानी सुनाने लगे हैं।
-मनीष-
नज़र की शमा को बुझाने लगे हैं।
उजाले अंधेरा बढ़ाने लगे हैं।
सफ़र ख़ाक1 में मिलने वाला है शायद,
मुसाफिर बग़ूले उड़ाने लगे हैं।
क़मर2 ने ख़ुदा जाने क्या कह दिया है,
समन्दर के लब3 थर-थराने लगे हैं।
मिरे रतजगों4 से परेशान होकर,
सितारे कहानी सुनाने लगे हैं।
ख्यालों की परवाज़5 बढ़ने लगी है,
ख़लाओं6 से पैग़ाम आने लगे हैं।
तिरा दर्द अब जाविदां7 हो चला है,
कि दिन रात हम मुस्कराने लगे हैं।
तमाशे की अब इन्तेहा हो रही है,
तमाशाई उठ-उठ के जाने लगे हैं।
1– धूल 2– चाँद 3– होंठ 4– रात्रि जागरण
5– उड़ान 6– अंतरिक्ष 7– अमर
..वयस्क श्रोताओं के बीच बाल कहानियों का पाठ।
-
‘साझी दुनिया’ लखनऊ की एक चर्चित संस्था है, जो ‘झूठा सच’ जैसे युगान्तरकारी उपन्यास लिखने वाले रचनाकार यशपाल जी के महानगर स्थित मकान (बी-335) में स्थित है। ...
2 दिन पहले


3 टिप्पणियॉं:
इक सुन्दर प्यारी सी गजल !
ख्यालों की परवाज़5 बढ़ने लगी है,
ख़लाओं6 से पैग़ाम आने लगे हैं।
तिरा दर्द अब जाविदां7 हो चला है,
कि दिन रात हम मुस्कराने लगे हैं।
behad khoobsurat bhaw hai is gajal mia
ख्यालों की परवाज़5 बढ़ने लगी है,
ख़लाओं6 से पैग़ाम आने लगे हैं।
lajawaab..........gazal ka har sher khoobsoorat
एक टिप्पणी भेजें