मधुमासों का पागल पंक्षी, साँझ-सुबह संगीत सुनाए।
मुझको मेरा प्यार बुलाए।
पल दो पल तुम साथ हुए थे, फिर मिलने की बात कहे थे,
पर, ये दिन तो बीत रहे हैं, क्यों बेदर्दी मुझे भुलाए?
मुझको मेरा प्यार बुलाए।
बिलख-बिलख नभी कहे कहानी, बीत रही यह भरी जवानी,
प्यासे अधरों की मत पूछो, तड़प-तड़प कर यूँ रह जाए।
मुझको मेरा प्यार बुलाए।
नभ की अनगिन दीपावलियाँ, सजतीं राहों में नव कलियाँ,
कोकिल दूर कहीं झुरमुट में, बिरहा का संगीत सुनाए।
मुझको मेरा प्यार बुलाए।
-सुबोध कुमार “सुधाकर”
हिन्दी ब्लॉगर्स अवार्ड
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3 टिप्पणियॉं:
बहुत अच्छी रचना है रचनाकार को मेरी बधाई .
सुधाकर जी की इस रचना को प्रस्तुत करने का आभार.
रूमानी जज्बात से भरपूर गजल।
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S.B.A. TSALIIM.
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