याद रखना तो सहज है, प्यार उससे भी सरल है,
जिस किसी को भूलना है, पूजता हूँ मैं उसी को।
याद रखने से कठिन है, भूल जाना यूँ किसी को।
प्रहर यूँ ही बीत जाते, दिन खुशी के रीत जाते,
पर विरह में दग्ध कोकिल, याद करती है उसी को।
याद रखने से कठिन है, भूल जाना यूँ किसी को।
चाहता सब भूल जाऊँ, इस जहाँ में फिर न आऊँ,
पर हृदय की टीस बेबस, खोजती है बस उसी को।
याद रखने से कठिन है, भूल जाना यूँ किसी को।
चिर पिपासित चातकी है, पी कहाँ कह भागती है,
वर्ष भर के बाद स्वाती, नेह देता है उसी को।
याद रखने से कठिन है, भूल जाना यूँ किसी को।
-सुबोध कुमार 'सुधाकर'
हिन्दी ब्लॉगर्स अवार्ड
"संवाद डॉट कॉम" द्वारा 20 श्रेणियों में दिये जाने वाले 2009 के श्रेष्ठ ब्लॉगर्स सम्मान की घोषणा प्रारम्भ हो चुकी है।
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3 टिप्पणियॉं:
bahut hee sundr rachna ,bdhai
सुधाकर जी रचना बहुत अच्छी लगी
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तख़लीक़-ए-नज़र । चाँद, बादल और शाम । गुलाबी कोंपलें । तकनीक दृष्टा
बहुत बढिया!! इसी तरह से लिखते रहिए !
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