हिन्दी ब्लॉगर्स अवार्ड

"संवाद डॉट कॉम" द्वारा 20 श्रेणियों में दिये जाने वाले 2009 के श्रेष्ठ ब्लॉगर्स सम्मान की घोषणा प्रारम्भ हो चुकी है।
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गंगा निकलनी चाहिए

हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए।
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।।

आज यह दीवार परदों की तरह हिलने लगी,
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए।

हर सड़क पर हर गली में हर नगर हर गाँव में,
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए।

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए।

1 टिप्‍पणियॉं:

Babli ने कहा…

आप एक बहुत ही अच्छे कवि और लेखक है! मुझे आपकी साडी कवितायें बहुत अच्छी लगी!