हुआ क्या जो रात हुई, नई कौन सी बात हुई?
दिन को ले गई सुख की आँधी, दु:खों की बरसात हुई।
पर क्या दु:ख केवल दु:ख है? वर्षा भी तो अनुपम सुख है।
बढ़ जाती है गरिमा दु:ख की, जब सुख की चलती है आँधी।
पर क्या बरसात के आने पर, कहीं टिक पाती है आँधी?
आँधी एक हवा का झोंका, वर्षा निर्मल जल देती।
आँधी करती मैला आँगन, तो वर्षा पावन कर देती।
आँधी करती सब उथल-पुथल, वर्षा देती हरियाला तल।
दिन है सुख तो दु:ख है रात, सुख आँधी तो दुख है बरसात।
दिन रात यूँ ही चलते रहते, थक गये हम तो कहते-कहते।
पर ख़त्म नहीं ये बात हुई।
दिन को ले गई सुख की आँधी, दु:खों की बरसात हुई।
पर क्या दु:ख केवल दु:ख है? वर्षा भी तो अनुपम सुख है।
बढ़ जाती है गरिमा दु:ख की, जब सुख की चलती है आँधी।
पर क्या बरसात के आने पर, कहीं टिक पाती है आँधी?
आँधी एक हवा का झोंका, वर्षा निर्मल जल देती।
आँधी करती मैला आँगन, तो वर्षा पावन कर देती।
आँधी करती सब उथल-पुथल, वर्षा देती हरियाला तल।
दिन है सुख तो दु:ख है रात, सुख आँधी तो दुख है बरसात।
दिन रात यूँ ही चलते रहते, थक गये हम तो कहते-कहते।
पर ख़त्म नहीं ये बात हुई।
-सीमा सचदेव






1 टिप्पणियॉं:
दिल को छू जाने वाली रचना।
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S.B.A. TSALIIM.
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