वीरान नजर आएगा

-सपन चन्दा

जब-जब इंसानी रिश्तों में दरार उभर आएगा।
तब-तब ये शहर हमें वीरान नजर आएगा।।

जब-जब मंदिर मस्जिद के मसले चौराहों पर हल होंगे
तब-तब राम और रहीम में फर्क हमको नज़र आएगा।

इंसान की इंसानियत का तब कौन देगा तकाज़ा,
जब भाई-भाई के ही खून का प्यासा बन जाएगा।

हम में हौसला है कि तूफानों का भी रूख मोड़ दें,
पर तुम्हारे शक का घेरा हमसे न तोड़ा जाएगा।

आओ सब मिलकर अपने शहर को बचालें सपन,
वर्ना मौत का साया हम पर भी छा जाएगा।।

A Hindi Poem (Ghazal) by Sapan Chanda

1 टिप्‍पणियॉं:

महामंत्री - तस्लीम ने कहा…

समकालीन दुनिया का चित्र दिखाती सामयिक गजल।

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S.B.A. TSALIIM.