-सपन चन्दा
जब-जब इंसानी रिश्तों में दरार उभर आएगा।
तब-तब ये शहर हमें वीरान नजर आएगा।।
जब-जब मंदिर मस्जिद के मसले चौराहों पर हल होंगे
तब-तब राम और रहीम में फर्क हमको नज़र आएगा।
इंसान की इंसानियत का तब कौन देगा तकाज़ा,
जब भाई-भाई के ही खून का प्यासा बन जाएगा।
हम में हौसला है कि तूफानों का भी रूख मोड़ दें,
पर तुम्हारे शक का घेरा हमसे न तोड़ा जाएगा।
आओ सब मिलकर अपने शहर को बचालें सपन,
वर्ना मौत का साया हम पर भी छा जाएगा।।
A Hindi Poem (Ghazal) by Sapan Chanda
...गर्मी को पानी से धोएँ, बारिश को हम खूब सुखाएँ
-
उनका मौसम
देवेन्द्र कुमार
गर्मी को पानी से धोएँ
बारिश को हम खूब सुखाएँ
जाड़े को फिर सेंक धूप से
अपनी दादी को खिलवाएँ।
कैसा भी ...
1 सप्ताह पहले


1 टिप्पणियॉं:
समकालीन दुनिया का चित्र दिखाती सामयिक गजल।
----------
S.B.A. TSALIIM.
एक टिप्पणी भेजें