-मोनी शंकर
कितना अच्छा होता
गर संसार में एक ही भाषा होती
एक ही धर्म होता
समाज जातियों में यूं विभक्त न होता
न इतनी भाषाएं सीखते
न इतने झगड़े होते
न खुदा को बांटना पड़ता
धरती पर रेखाएं खींचे बगैर
बिना पासपोर्ट कोई कहीं भी आ-जा सकता
मौसम बदलने पर अनुकूल जगह पर
अपनी उड़ान भर सकता
सारे सागर सांझे
सारे वृक्ष सांझे
प्रकृति का हर कण
गुरूद्वारे के लंगर की तरह सांझा
यह देश मेरा न कहकर
यह विश्व मेरा कहते
तो कितना अच्छा होता।
A Hindi Poem by Moni Shankar
...गर्मी को पानी से धोएँ, बारिश को हम खूब सुखाएँ
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उनका मौसम
देवेन्द्र कुमार
गर्मी को पानी से धोएँ
बारिश को हम खूब सुखाएँ
जाड़े को फिर सेंक धूप से
अपनी दादी को खिलवाएँ।
कैसा भी ...
1 सप्ताह पहले


1 टिप्पणियॉं:
सचमुच अचछा होता।
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S.B.A. TSALIIM.
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