-मनीष
जिसके होठों पे कहकहा होगा।
उसने क्या-क्या नहीं सहा होगा।
बेहिसी1 बेसबब नहीं होती,
ज़ख़्म गहरा कोई लगा होगा।
मंजिलें दूर हैं सफ़र तन्हा,
हम जो भटके तो जाने क्या होगा।
हमसे दुनिया की बात मत करिए,
आपका लुत्फ़2 बदमज़ा3 होगा।
काम सारे ये सोचकर ही किए,
हमको अल्लाह देखता होगा।
ज़हन4-ओ-दिल पे धुंआ सा है छाया,
फिर कोई ख़्वाब जल गया होगा।
आज फिर से है शहर में रौनक,
कल कोई हादसा हुआ होगा।
1– संवेदनहीनता 2– आनन्द 3– स्वाद खराब होना 4– विचारधारा
..वयस्क श्रोताओं के बीच बाल कहानियों का पाठ।
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‘साझी दुनिया’ लखनऊ की एक चर्चित संस्था है, जो ‘झूठा सच’ जैसे युगान्तरकारी उपन्यास लिखने वाले रचनाकार यशपाल जी के महानगर स्थित मकान (बी-335) में स्थित है। ...
2 दिन पहले


5 टिप्पणियॉं:
आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा.
ऎसेही लिखेते रहिये.
क्यों न आप अपना ब्लोग ब्लोगअड्डा में शामिल कर के अपने विचार ऒंर लोगों तक पहुंचाते.
जो हमे अच्छा लगे.
वो सबको पता चले.
ऎसा छोटासा प्रयास है.
हमारे इस प्रयास में.
आप भी शामिल हो जाइयॆ.
एक बार ब्लोग अड्डा में आके देखिये.
subhan aalah .....kya baat likhi hai.ek problem hai aapke blog par pahli gajlo me comment ke liye koi jagah nahi mil rahi hai...
aapka aakhiri sher bahut badhiya hai...
very nice blog...
http://shayrionline.blogspot.com/
huzoor ! bahot kuchh umda.umda parh liya aapke blog pr...
abhi to Dr Ganesh Dutt ji ki ghazal
pr comments karne ko mn hai...
"aafreeN, sub.haanallah, mar.hbaa,
kya kahooN hr sher pr, kuchh boliye.."
---MUFLIS---
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